G7 शिखर सम्मलेन – क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
आपने अक्सर समाचार में "G7" शब्द सुना होगा, लेकिन असल में ये कौन‑से सम्मेलन होते हैं? G7 सात बड़ी आर्थिक ताकतों (अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूके) का समूह है। इन देशों की मिलकर हर साल एक-दूसरे से नीतियों पर चर्चा करती है – चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा हो या जलवायु परिवर्तन.
सत्र के दौरान प्रमुख बिंदु तय होते हैं: वैश्विक आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा कीमतों का नियंत्रण और कोविड‑19 जैसे महामारी के बाद की पुनर्स्थापना. इन निर्णयों का असर सीधे हमारे देश में भी दिखता है – आयात‑निर्यात नियम बदलते हैं, निवेश के अवसर बनते हैं, और अक्सर नई तकनीकें भारतीय बाजार में आती हैं.
पिछला G7 शिखर सम्मेलन: मुख्य निष्कर्ष
2024 का G7 मिलानट में हुआ था। वहाँ ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए गए – सदस्य देश नवीनीकरणीय ऊर्जा पर 40% निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. साथ ही, डिजिटल सवेंदनशीलता और साइबर सुरक्षा पर भी गंभीर चर्चा हुई.
एक खास बात थी कि इस बार भारत को अतिथि राष्ट्र का दर्जा मिला था। इसका मतलब सिर्फ औपचारिक आमंत्रण नहीं, बल्कि भारतीय प्रतिनिधियों को सीधे निर्णय‑निर्माण प्रक्रिया में आवाज़ देने का मौका मिला. कई बार बताया जाता है कि "अतिथि की सहभागिता" से ही नीतियों में विविधता आती है.
भारत के लिए G7 का क्या मतलब?
जब भारत G7 मंच पर आता है, तो दो मुख्य फ़ायदे होते हैं – आर्थिक और रणनीतिक. आर्थिक तौर पर, निवेशकों को भरोसा मिलता है कि भारत स्थिर और विश्वसनीय बाजार है. इससे विदेशी फंड्स की इनफ़्लो बढ़ती है, नई तकनीकें हमारे उद्योगों में आती हैं.
रणनीति के लिहाज़ से, G7 के साथ मिलकर जलवायु लक्ष्य तय करना हमें अपने कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मदद करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर G7 देशों ने हर साल 5% सौर पैनल उत्पादन बढ़ाने का वचन दिया, तो भारतीय कंपनियों को निर्यात‑उपलब्धियां मिल सकती हैं.
साथ ही, सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी मजबूत होता है। कई बार G7 सदस्य देश भारत के साथ संयुक्त अभ्यास या टेक्नोलॉजी शेयरिंग की घोषणा करते हैं, जिससे हमारे सेनाओं का आधुनिकीकरण तेज़ हो जाता है.
आप सोच रहे होंगे कि रोज़मर्रा की जिंदगी में इसका असर कैसे दिखेगा? सरल शब्दों में – अगर ऊर्जा कीमतें स्थिर हों तो पेट्रोल‑डिज़ल के बिल कम आएँगे, यदि निवेश बढ़े तो नई नौकरियां बनेंगी, और अगर तकनीक का आदान‑प्रदान हो तो हमारे मोबाइल या इंटरनेट सेवाएँ तेज़ होंगी.
आगामी G7 शिखर सम्मेलन 2025 में जापान में निर्धारित है. भारत फिर से अतिथि के रूप में शामिल होने की संभावना है. इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि इस मंच पर क्या चर्चा होगी, ताकि हम समय रहते तैयार रह सकें.
सारांश में कहें तो G7 शिखर सम्मलेन सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मीटिंग नहीं, बल्कि वह पुल है जो विश्व के बड़े देशों को भारत से जोड़ता है. अगर आप आर्थिक और सामाजिक बदलावों की दिशा जानना चाहते हैं, तो इस सम्मेलन के निर्णयों पर नज़र रखें.

PM मोदी का G7 शिखर सम्मेलन में इटली की प्रधानमंत्री जोर्जिया मेलोनी के साथ वायरल सेल्फी वीडियो पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली के अपुलिया क्षेत्र में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जोर्जिया मेलोनी के साथ अपने वायरल सेल्फी वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। इस वीडियो में दोनों नेताओं को हंसते हुए देखा जा सकता है। मोदी ने वीडियो को 'लॉन्ग लिव इंडिया-इटली फ्रेंडशिप!' कैप्शन के साथ साझा किया। मोदी ने इस सम्मेलन में मेलोनी के आमंत्रण पर भाग लिया।
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